चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रधान सचिव तथा 1992 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अरुण कुमार गुप्ता की आईएएस सेवा से सेवानिवृत्ति 30 सितंबर 2026 को निर्धारित है। गुप्ता वर्तमान में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के साथ-साथ वित्त एवं योजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल रहे हैं।
उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति को लेकर प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा चल रही है कि क्या उन्हें 60 वर्ष की आयु के बाद आईएएस में सेवा-विस्तार मिल सकता है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एवं प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार के अनुसार, अरुण गुप्ता का जन्म 14 सितंबर 1966 को हुआ है और उन्होंने इसी माह 60 वर्ष की आयु पूरी की है। अखिल भारतीय सेवाएं (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 के नियम 16(1) के तहत सामान्य व्यवस्था में अखिल भारतीय सेवा का अधिकारी उस महीने के अंतिम दिन की दोपहर से सेवानिवृत्त होता है, जिसमें वह 60 वर्ष की आयु पूरी करता है। इस आधार पर गुप्ता की सेवानिवृत्ति 30 सितंबर 2026 को निर्धारित है।
राज्य की सिफारिश पर केंद्र दे सकता है सेवा-विस्तार
हेमंत कुमार ने बताया कि विशेष परिस्थितियों में संबंधित राज्य सरकार किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को सेवा-विस्तार देने के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश भेज सकती है। ऐसे मामलों में केंद्र स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लिया जाता है। उन्होंने कहा कि वित्तीय एवं बजट निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में अधिकारी की भूमिका को भी संबंधित प्रस्ताव में तथ्यात्मक आधार के रूप में रखा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि 60 वर्ष की आयु के बाद अखिल भारतीय सेवा अधिकारी को सेवा-विस्तार दिए जाने की व्यवस्था सामान्य सेवानिवृत्ति से अलग एक विशेष व्यवस्था है और इसके लिए सक्षम केंद्रीय प्राधिकारी की स्वीकृति आवश्यक होती है।
री-एम्प्लॉयमेंट का विकल्प भी मौजूद
हेमंत कुमार के अनुसार, यदि केंद्र सरकार की ओर से आईएएस में सेवा-विस्तार प्रदान नहीं किया जाता, तब भी राज्य सरकार के स्तर पर री-एम्प्लॉयमेंट (पुनर्नियुक्ति) का कानूनी विकल्प उपलब्ध हो सकता है। उनके अनुसार, आईएएस (कैडर) नियम, 1954 के नियम 9(1)(ए) के तहत सेवानिवृत्त अधिकारी को निर्धारित शर्तों के अधीन सीमित अवधि के लिए किसी कैडर पद पर पुनर्नियुक्त किए जाने की व्यवस्था है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे तकनीकी रूप से ‘एक्सटेंशन’ नहीं बल्कि ‘री-एम्प्लॉयमेंट’ कहा जाता है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अवधि तक नियुक्ति की जा सकती है, जबकि निर्धारित सीमा से अधिक अवधि के लिए केंद्र सरकार की स्वीकृति का प्रश्न उठता है।
मुकेश आहूजा का उदाहरण
हेमंत कुमार ने हालिया उदाहरण देते हुए बताया कि 2009 बैच के आईएएस अधिकारी मुकेश आहूजा की मार्च 2026 के अंत में सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें 1 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक तीन महीने की पुनर्नियुक्ति दी गई थी। इस अवधि में उन्होंने हरियाणा लोक सेवा आयोग के सचिव के रूप में कार्य किया तथा कुछ समय हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के मुख्य प्रशासक का कार्यभार भी संभाला।
ऐसे में अरुण गुप्ता के मामले में भी 30 सितंबर को सेवानिवृत्ति के बाद केंद्र द्वारा आईएएस में सेवा-विस्तार अथवा, अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत, राज्य सरकार द्वारा सीमित अवधि की पुनर्नियुक्ति—दोनों व्यवस्थाओं के नियमगत पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
एडवोकेट हेमंत कुमार का कहना है कि अंतिम निर्णय संबंधित सेवा नियमों, सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी और सरकार द्वारा जारी औपचारिक आदेश पर निर्भर करेगा।